देश में शांति और खुशहाली यूँ ही नहीं आती है... इसके लिए कुछ देश भक्त जाँबाजों को अक्सर अपना बलिदान देना पड़ता है !!!
👉 जनपक्षीय पत्रकार नितिन सिन्हा की बेबाक कलम से... बीते कल कि यह घटना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है । एक तरफ केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर में शांति बहाली और विकास का लगातार दावा और प्रयास कर रही है... तो दूसरी तरफ विघ्न सन्तोषी ताकतों ने भी इस तरह के हमलों का क्रम जारी रखा है । हालाकि पांच जवानों की असमय शहादत ने पूरे देश की आंखे तो नम कर दी हैं,,परंतु कुछ सुलगते सवाल भी पीछे छोड़े है... जिनमें सबसे पहला सवाल...? एंटलिजेंस फेलुवर का है ?? क्या खुफिया तंत्र को ज्यादातर बार की तरह इस बार भी उक्त सुनियोजित हमले की पूर्व सूचना नहीं मिल पाई थी ?? दूसरा सवाल गोदी मीडिया की भूमिका से है...जो आजकल पूरे दिन भारतीय सेना की आवश्यकताओं से ज्यादा उपलब्ध संसाधनों पर उल्टी सीधी और अप्रमाणित खबरे दिखाता रहता है,,जिसका ग्राउंड रिपोर्ट से दूर दूर तक कोई लेना देना नही होता है, गोदी मीडिया की मानें तो मोदी जी के प्रधान मंत्री बनने के बाद वर्ष 2015 से ही इतिहास में पहली बार जम्मू कश्मीर और लद्दाख रेंज में तैनात भारतीय सैनिकों और जवानों को फ्रांस और इजराइल सेना की तर्ज पर मध्यम बुलेट प्रूफ वाहन या मार्क्समैन ...