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गांधी की नैतिक आभा से डरने वाले लोग दुष्प्रचार का सहारा लेते हैं, लेकिन गांधी के विराट व्यक्तित्व के सामने कोई झूठ कभी नहीं टिक पायेगा- शैलेन्द्र कुमार

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  गोडसे के जीवन से गांधी की हत्या को निकाल दिया जाये तो गोडसे का कहीं नाम तक सुनने को नहीं मिलेगा- अशोक कुमार पांडेय  आज हत्यारों के पक्ष में गढ़ा जा रहा है तर्क- सुजाता चौधरी खचाखच भरे दीनदयाल सभागार में सैंकड़ों नागरिकों व युवाओं ने याद किया गांधी को गांधी की शहादत के 75 वें साल पर रायपुर में हुआ बड़ा आयोजन  कई गांधीवादियों व शहर के गणमान्य नागरिकों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया    प्रदर्शनी, भजन, वक्तव्य और संवाद में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया नौजवानों ने  रायपुर(पंचायत टुडे):- नीचे से लेकर ऊपर की मंजिल तक खचाखच भरे रायपुर के दीनदयाल उपाध्याय सभागार में आज सुबह नागरिकों व युवाओं ने गांधी के जीवन और विचारों पर आयोजित संवाद में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। साहित्य अकादमी छत्तीसगढ़, सन्मति और अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के इस संयुक्त कार्यक्रम की शुरुआत हॉल के बाहर रखी गांधी की एक बड़ी तस्वीर पर पुष्पांजलि के साथ हुई। इसके बाद सभागार में 11 बजे दो मिनट का मौन रखा गया। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के समूह ने गांधी के चार भजन प्रस्तुत किए। शुरुआत में गां...

30 जनवरी को गांधी की शहादत को याद करेगा रायपुर शहर

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‘हे राम! गांधी की शहादत के 75 साल’ पर साइंस कॉलेज ऑडिटोरियम में कार्यक्रम     साहित्य अकादमी, सन्मति व अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन का आयोजन डॉ सुजाता चौधरी, अशोक कुमार पाण्डेय और शैलेन्द्र कुमार करेंगे युवाओं से संवाद  वक्तव्य, संवाद, गांधी भजन और पोस्टर प्रदर्शनी  रायपुर। महात्मा गांधी की शहादत के 75वें साल पूरे होने पर देश भर में होने वाले कार्यक्रमों के सिलसिले में रायपुर में 30 जनवरी को छत्तीसगढ़ की तीन संस्थाएं मिलकर एक बड़ा कार्यक्रम कर रही हैं। साइंस कॉलेज परिसर स्थित डीडीयू सभागार में सुबह 10.30 बजे से चर्चा, संवाद, गांधी भजन और पोस्टर व चित्र प्रदर्शनी आयोजित किए जा रहे हैं।  आयोजक संस्थाओं साहित्य अकादमी छत्तीसगढ़, सन्मति और अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन ने अपने संयुक्त वक्तव्य में कहा है कि यह कार्यक्रम प्रेम, करुणा और विवेक के अविस्मरणीय नायक महात्मा गांधी की अनमोल विरासत को सहेजने और आगे बढ़ाने की एक विनम्र कोशिश है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अपने जीवन की हर सांस को भारत की आजादी व स्वाभिमान के लिए समर्पित कर देने वाले उस महानायक के प्रति आभार ज...

कितने स्वार्थी हो चुके है,हम लोग जो हमारी सुरक्षा के लिए अपनी जान को खतरे में डालता है,हम उनकी जान बचाने का तनिक भी प्रयास नही करते हैं।

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प्रस्तुत घटना क्रम अकेला ऐसा मामला नहीं है,जहां हम सैकड़ों हजारों की संख्या में खड़े हम भारतीय नपुंशक या यू कहें स्वार्थी और मतलबी मुकदर्शक बन कर तमाशा देखते रहे।। जबकि राजधानी दिल्ली में घटी उक्त शर्मनाक घटना, मूक दर्शक बने रहने की जगह थोड़े से प्रयास से रोकी जा सकती थी.. भीड़ कर लेती साहस तो जिंदा होते जांबाज एस आई शंभूलाल दयाल एस आई शंभूलाल दयाल जैसा साहस भीड़ में किसी ने भी नहीं दिखाया। अगर भीड़ में से किसी एक ने भी हिम्मत दिखाई होती तो शायद आज शंभूलाल आज जिंदा होते। घटना का वीडियो देखने से पता चल रहा है कि सैकड़ों की भीड़ एक टुच्चे से अपराधी की धमकी मात्र से कायर चूहों की तरह डर गई। वहीं एस आई शंभूलाल अंतिम सांस तक अपराधी से लोहा लेते रहे। हां ये अलग बात रही कि घटना में बुरी तरह से आहत शहीद शंभू लाल अस्पताल में दम तोड़ते वक्त ये जरूर सोंचते रहे होंगे कि "मैंने तो अपना फर्ज बखूबी निभाया पर जिन लोगों की सुरक्षा के लिए मैं हथियार बंद दुर्दांत अपराधी से लड़ गया क्या उन लोगों का मेरे या मेरे जैसे दूसरे वर्दी वाले रक्षकों के प्रति कोई जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए??...